1. नफरत करने वाले आपसे नफरत नहीं करते हैं, वास्तव में वे खुद से नफरत करते हैं क्योंकि आप उनका प्रतिबिंब हैं।
2. एक व्यक्ति दूसरे लोगों के बारे में आपसे कैसे बात करता है, इसे ध्यान से सुनें। निश्चित ही इस तरह वे आपके बारे में दूसरे लोगों से बात करते हैं।3. बस दो ऐसे सच्चे दोस्त काफी हैं, जिन पर हम आंख मूंदकर भरोसा कर सकें। आज के दौर में बहुत सारे दोस्त होने का मतलब अक्सर दिखावा और 'फॉर्मेलिटी' होता है।
5. अपनी समस्याओं को दूसरों को बताना बंद करें, 20% लोगों को परवाह नहीं है और अन्य 80% खुश हैं कि आप परेशान हैं।
6. पढ़ाई के दौरान चॉकलेट खाने से याद रखने की शक्ति बढ़ती है।
चॉकलेट खाने से दिमाग तेज चलता है, जिससे एग्जाम में बेहतर स्कोर मिलता है।
9. जो लोग कटाक्ष (ताने) को अच्छी तरह समझते हैं वे अक्सर.. लोगों के मन को पढ़ने में भी अच्छे होते हैं।
10. यदि आपका मन बार-बार भटकता है, तो 85% संभावना है कि आप अवचेतन रूप से अपने जीवन से नाखुश हैं।
11. अगर माता-पिता हमेशा डांटते हैं, आलोचना करते हैं या बच्चे को नीचा दिखाते हैं, तो बच्चा बड़ा होकर खुद पर संदेह करने लगता है। उसके मन की आवाज़ हमेशा उसे डराती है कि "मैं काबिल नहीं हूँ" या "मुझसे गलती हो जाएगी।"
12. अपने नकारात्मक विचारों को लिखना और उन्हें कूड़ेदान में फेंक देना आपके मूड को बेहतर बना सकता है। (यह वास्तव में काम करता है )
13. ध्यान का अभ्यास करने से केवल आठ हफ्तों में आपके मस्तिष्क की बनावट बदल सकती है, खासकर उन हिस्सों में जो सीखने के लिए ज़रूरी हैं, नियमित ध्यान अभ्यास से याददाश्त में सुधार हो सकता है ।
15. घर पर हों या बाहर, एक समय पर एक ही काम करें। अगर किसी जरूरी काम में व्यस्त हैं, तो उस दौरान बात न करें। कोई आपसे बात करना चाहता है, तो अपना काम कुछ समय के लिए छोड़कर उसकी बात सुनें। जरूरी काम है, तो उससे कुछ देर रुककर बात करने का अनुरोध कर सकते हैं। अगर एक ही समय में दोनों काम करेंगे तो सामने वाले की बात समझ नहीं सकेंगे और न ही जवाब दे पाएंगे।
16. बात-बात पर बहाने बनाना, अपनी कही बात से मुकर जाना या बात पलट देना किसी तरह की बाज़ीगरी नहीं है। बात का पक्का होना भी बातचीत के शिष्टाचार का हिस्सा है। अगर बातों में बहाने और झूठ ज्यादा होगा, तो घर और बाहर के लोग आपकी बात पर विश्वास नहीं करेंगे और आपकी बातों को ही नहीं, आपको भी नजरअंदाज करेंगे।
17. जो व्यक्ति अकेले रहकर खुश रहना सीख लेता है, वह भीड़ में भी खुद को खोता नहीं है। उसे किसी की मौजूदगी से अपनी कीमत तय नहीं करनी पड़ती।
18. हर बात का तुरंत जवाब देना आपकी समझदारी नहीं, बल्कि कई बार आपकी बेचैनी दिखाता है। सही समय पर चुप रहना भी एक उत्तर होता है।
19. जो लोग कम बोलते हैं, वे अक्सर ज्यादा सोचते हैं। उनकी खामोशी खाली नहीं, बल्कि विचारों से भरी होती है।
बार-बार अपनी सफाई देना इस बात का संकेत है कि आप खुद पर पूरा भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। आत्मविश्वासी व्यक्ति को खुद को साबित करने की जरूरत कम पड़ती है।
20. जो व्यक्ति दूसरों की सफलता से जलता है, वह असल में अपनी असफलताओं से भाग रहा होता है।
21. हर किसी से अपनी गहरी बातें साझा करना ईमानदारी नहीं, बल्कि भावनात्मक असावधानी है। अपनी बात वहीं कहें, जहां उसे समझा जाए।
22. जो लोग आपकी सीमाओं का सम्मान नहीं करते, वे आपको नहीं, आपकी सहनशीलता का फायदा उठाते हैं।
23. बार-बार पुरानी गलतियों को याद करना पछतावा नहीं, बल्कि वर्तमान को कमजोर करना है। सीख लेकर आगे बढ़ना ही समझदारी है।
24. जो व्यक्ति हर हाल में खुद को शांत रखना सीख लेता है, वही असल में परिस्थितियों पर नियंत्रण रखता है, क्योंकि बाहर का शोर तभी असर करता है जब भीतर अशांति हो।
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