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भाग्य से भागा नहीं जा सकता | story about fate and destiny

 
मृत्यु का निमंत्रण | MRITYU KA NIMANTRAN | Invitation To Death In Hindi By Saral Vichar


सुबह का समय था। ठंडी हवा बह रही थी। बागों में ओस की बूंदें चमक रही थीं। सम्राट सोलोमन अपने कक्ष में उठकर बैठे ही थे कि दरवाजे पर तेज़ कदमों की आहट हुई। बिना इजाज़त, उनका एक वज़ीर भीतर आ गया। उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया था, पसीने की बूंदें उसके माथे पर लटक रही थीं।

सोलोमन ने हैरानी से पूछा, “क्या हुआ? तुम इतने घबराए क्यों हो? अभी सूरज भी पूरी तरह नहीं निकला है।”

वज़ीर हड़बड़ाए स्वर में बोला, “मुझे समय नहीं है महाराज! बस इतना कीजिए, अपना सबसे तेज़ घोड़ा मुझे दे दीजिए। मैंने आज रात एक भयानक सपना देखा है। मौत मेरे सामने खड़ी थी। उसने साफ़ कहा, ‘कल शाम मैं तुम्हें लेने आऊंगी।’”

सोलोमन ने शांत स्वर में पूछा, “लेकिन तेज़ घोड़े का तुम क्या करोगे?”

वज़ीर बोला, “महाराज! मैं यहां से भाग जाऊंगा। यहां रुकना अब मौत को न्योता देने जैसा है। मैं दमिश्क चला जाऊंगा। वह सैकड़ों मील दूर है। अगर मैं अभी निकला, तो शायद बच जाऊं। कृपया, समय बर्बाद न करें!”

सोलोमन ने अपने शाही अस्तबल से सबसे तेज़ घोड़ा बुलवाया और वज़ीर को दे दिया। वज़ीर ने घोड़े पर सवार होकर बिना पीछे देखे, बिना कुछ कहे वहां से प्रस्थान किया।

सोलोमन यह दृश्य देखकर सोच में पड़ गए। वह स्वयं गहरे बुद्धिमान और अनुभववान थे। उन्होंने आंखें बंद कीं, और मौन में मृत्यु का स्मरण किया। अचानक जैसे मृत्यु उनके सामने प्रकट हुई।

सोलोमन ने गंभीर स्वर में कहा, “ये तुमने क्या किया? मेरे वज़ीर को क्यों डराया? बिना वजह चेतावनी दी। मरना हो, मारो, लेकिन पहले से सूचना देना – यह कैसा तरीका है? लोग जीते हैं क्योंकि मौत अचानक आती है। अगर सबको पहले से खबर मिलने लगे, तो जीना असंभव हो जाएगा।”

मौत मुस्कुराई। उसने धीरे से कहा, “महाराज, आप गलत समझ रहे हैं। मैं खुद हैरान थी। आज शाम मेरा आदेश है कि मैं उसे दमिश्क में लूं। लेकिन सुबह-सुबह वह यहीं आपके दरबार में बैठा था। सैकड़ों मील की दूरी थी। मैं सोच रही थी यह कैसे संभव होगा। इसलिए मैंने उसे देखा और उसे घबराहट में डाला, ताकि वह भागे। उसे दमिश्क पहुंचना ही था, क्योंकि वहीं उसका समय तय है।’’

सोलोमन ने चौंककर पूछा, “तो वह वहां जाएगा?”

मौत ने शांति से उत्तर दिया, “हां महाराज, वही उसका ठिकाना है। चाहे आदमी गरीब हो या अमीर, फकीर हो या बादशाह – सभी रास्ते आखिरकार एक ही जगह ले जाते हैं।”

सांझ ढलने लगी। दमिश्क की हवा में हल्की ठंडक उतर आई थी। वज़ीर अपने घोड़े से उतरकर बगीचे में गया। उसने घोड़े की पीठ थपथपाई और कहा, “वाह! तू सचमुच सोलोमन का घोड़ा है। तूने सैकड़ों मील पार करवा दिए। अब मैं सुरक्षित हूं।”

तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा। उसने पलटकर देखा - उसके पीछे मौत खड़ी थी।

वज़ीर घबराकर बोला, “तुम यहां कैसे? मैंने तो इतनी दूर आकर बचने की कोशिश की थी।”

मौत ने उसकी ओर देखकर धीमे स्वर में कहा, “घबराओ मत। तुम्हारा घोड़ा वाकई तेज़ है। मैं खुद सोच में थी कि तुम दमिश्क समय पर पहुंचोगे कैसे। लेकिन तुमने मुझे आसान कर दिया। अब ठीक वही वक्त है और वही जगह जहां तुम्हें होना था।’’

फिर वह आगे बोली, “तुम गरीब की तरह आओ या अमीर की तरह, फकीर की तरह या राजा की तरह – सभी एक ही जगह पहुंचते हैं। सभी रास्ते मौत की ओर ही जाते हैं। कोई भी अपने भाग्य से भाग नहीं सकता।”

मौत से भागा नहीं जा सकता। जीवन की डगर चाहे जैसी भी हो, अंततः सबको उसी मंज़िल तक जाना होता है।

सरल विचार

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Topics of Interest


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