जीवन में अक्सर ऐसा होता है कि काम और पैसे के पीछे भागते-भागते हम अपने लिए और अपने अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते। यही कारण है कि हम ख़ुशी और सुकून के लिए तरसते रह जाते हैं। जीवन में इतना तेज भी क्या भागना कि ख़ुशियां पीछे रह जाये। और ख़ुशी सिर्फ पैसों से नहीं मिलती। अपनों का साथ, परिवार से स्नेह, सम्बन्ध आपको सुरक्षा का एहसास कराते हैं।
जो व्यक्ति बात बात पर अपनी बात को विश्वास दिलाने के लिए कसमें खाता, जल्दी जल्दी बोलता है, उसकी बात में दम कम होता है ।
बचपन में प्यार और सहानुभूति से वंचित ज्यादातर बच्चे बड़े होकर निर्दयी अपराधी बनते है। अगर ऐसे बच्चे अगर पढ़ लिख कर किसी अधिकारी वाली जगह बैठ जाते हैं तो वो अपने अधीन कर्मचारियों को दुखी और परेशान करने में आनंद का अनुभव करते हैं।
जब एक नई पेन के साथ लिखने की पेशकश की जाती है तो 97% लोग अपना नाम लिखते हैं।
बाएं हाथ वाले लोग अधिक अंतर्मुखी होते हैं।
जो जीवन में कुछ नहीं कर पाते वो बहाने बनाते हैं ।
बड़े बड़े कॉम्प्लेक्स और दुकानों से चुप चाप लुटकर आए हुए लोग,,, सब्जीवाले, रिक्शावाले आदि छोटे लोगों से चवन्नी के लिए लड़ते हैं।
ऐसा कहने वाले,,,"कुछ भी नहीं पढ़ा यार", कहां यार , कैसे यार .. आदि कहने वाले यकीन मानिए आपसे ज्यादा पढ़ते हैं।
आंखे बंद कर के पढ़ने से चीज़ें ज्यादा याद होती हैं।
यदि किसी परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद कोई आपसे नंबर पूछे और आप बता दें तो 90% संभावना ये है कि आपके द्वारा उसके नंबर पूछे जाने पर आपको पहला जवाब "कम ही है यार" मिलेगा।
जब आपके आस-पास पेड़ या पौधे होते हैं तो आपका मस्तिष्क कुछ रसायनों को स्त्रावित करता है जो सोच को बढ़ाते हैं। इसलिए मनोवैज्ञानिक उपचार में बगीचे में टहलना भी शामिल है।
SARAL VICHAR
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Topics of Interest
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